Tuesday, 1 October 2019

माँ मैं कैसे जी रही हूँ

माँ मैं कैसे जी रही हूँ
मुझे लगता था मैं तेरे बिना न जी पाऊंगी,
तू यूँ छोड़ दे गई गर तो, मैं तो मर ही जाउंगी,
पर माँ मैं कैसे जी रही हूँ ।

तूने कहा था मुझे एक दिन तेरे पँख हैं,
 जा तू उड़ जा,
जहाँ जीवन ले जाए तूझे, तू उधर ही मुड़ जा,
पर फिर क्यूं बेड़ियों में जकड़ दिया मुझे इस संसार ने,
क्यूं कहा मुझे तू स्त्री है ,
तेरा खुद का कोई अस्तित्व नहीं, तू लाचार,
तू है अबला, है तेरा कोई कर्तव्य भी,
माँ मैं कैसे जी रही हूँ।

माँ क्यूं औरत को ही कर्तव्य निभाने होते हैं,
क्यूं औरत को ही जीवन भर बोझ उठाने होते हैं,
क्यूँ बना  दिया मुझे पीड़िता,
और सबने बस मेरा शोषण किया,
तू तो कहती थी मैं हु दुर्गा, मैं हूं लष्मी ,
माँ तूने देवी का रूप दिया,
पर क्यु मुझे भी वही जीवन जीना होगा जो तुने जिया,
फिर बता क्यूँ लाई मुझे तू इस संसार में ,
गर हर काष्ट भी दिया था तूने मुझे उधर में।

माँ मैं कैसे जी रही हूँ,
तू यूँ छोड़ दे गी गर तो मैं तो मर ही जाउंगी ,
माँ ये मैं कैसे जी रही हूँ।

तुम हो नहीं ऐसे

तुम हो नहीं एसे,
तुम वादे तो करते हो पर उन्हें पूरा कर जाओ,
तुम हो नहीं एसे ।

सपने तो खुब दिखाते हो
पर उन्हें सच जो कर जाओ
ना, तुम हो नहीं एसे।

माँ गर में बनी तो पिता होने का तुमने जो वादा किया था,
उन्हें ही तुम निभाओ और अगर एकाद बार बच्चों को जो लड़ लगाओ,
जो गर मैं थक गई रात भर और सुबह गर तुम नाश्ता बनाओ,
तुम हो नहीं एसे।

सारा दिन इंतज़ार किए की आज तो तुम जल्दी आओगे,
मुझे आज तो बाहर लेजाओगे,
सोचा था नई पिक्चर लगी है मिशन मंगल,
सब आस पड़ोसी देख आए शायद आज तो दिख ही लाओगे,
सुबह डब्बे में पनीर मखनी ओर रोटी दी जो दिया था,
आज जरूरी खुश हो जाओगे,
पर हए रे मेरी यादाश्त मैं भूल गई के,
तुम हो नहीं एसे।

आज तो माँ बापूजी आए थे,
सुबह ही तो तुम्हे बताया था,
शाम भी तुम्हारे इंतजार में निकल गई,
माँ बोली के तू ख्याल रखना,
भूल गए होंगे शायद दुबारा आएंगे तो ज़रूर जल्दि आएगा,
बेटा है हमारा, अपने माँ बाप को क्या ऐसे देख पाएगा,
ये कहते ही उनकी आंखों से आसूं छलक गए,
फिर अलविदा कह के माँ भी चली गई,
उस दिन रात बीत गई ये सोचते सोचते
 क्या कभी तुम मुझे समझ  पाओगे,
फिर याद आया के,
तुम हो नही ऐसे।

उम्र बीत गई अब ,
पर आज भी मैं वहीं खङी हूँ,
राह देखते समय बीत गया ,
पर फिर भी यही सोचती हूँ,
की शायद अब तो तुम मुझे खोजते आओगे,
पर हए रे मेरी किस्मत,
तुम्हें तो भूलने की बीमारी सी हो गई है,
तुम तो कभी कभी मेरा नाम भी भूल जाते हो,
फिर क्या तुम मेरा प्यार और अपने वादे निभाओगे,
तुम तो हो नहीं ऐसे
तुम हो नहीं एसे।